“आप”
आप के दिमाग की धूल साफ करने आया था आप ,
सादगी की परछाई बन कर आया था आप ,
एक मफ़लर लपेट कर मुख्यमंत्री बना आम जनता का संत्रि बना ,
दर्द को समझा आम के आम का सहारा बना ,
मैं चला अपनी पुरानी गाड़ी में झाड़ू लेकर ,
भूल गया पद अपना छोटे से राज काल में इस ,
दो महीने के साल में ,
सोचा उन्नति दे दूँ पर .....जाने क्या हुआ क्यूँ काला साया पड़ा ,
के जन का सेवक आज उठ न सका, कल गूंगे हो जाओगे आवाज़ कहाँ
होगी ,
आज मैं निकला कल तुम निकले यह है भ्रष्टाचार की व्यथा ,
भारत है गरीब और गरीब है बन रहा यही है बस यही है आप की व्यथा ,
आपकी धूल उड़ाते उड़ाते खुद धूल हो गया ,आम
के लिए लड़ा बड़ी भूल हो गया ,
जो दिख रहा वो मिथ्या है जो न दिखे वो सत्य है ,
आप बसे हर “आप” के दिल में जीवन में ये लगता कढ़वा सत्य है ,
इतिहास गवाह है आम मरता है कतारों में ,
मैं उठा आप बनकर गिर भी गया यह आप का सत्य है ..................जागो
भारत
अभी सो गए तो मौसम बदल जाएगा............
फिर कौन मेहनत की खाएगा ...........
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